Monday, March 6, 2017

बॉस इज ऑलवेज राईट (लघुकथा)


स इज ऑलवेज राईट (लघुकथा)



   सभी कर्मचारियों को फ़ौरन बॉस के चेंबर में इमरजेंसी मीटिंग के लिए बुलाया गया l एक ने कहा आज बॉस का माथा बहुत गरम हैं l तभी मिसेस सान्याल बोली - "हाँ मुझे डांटने के लिए बुलाया होगा l " कुछ देर पहले मिसेस सान्याल और मिसेस बरुआ को बॉस ने बुलाकर खूब डाटा था ,यह कहते हुए कि दोनों ने टाइम से काम पूरा करके नहीं दिया l बॉस का सीधा-सीधा मतलब था कि वे कामचोर हैं ,अपनी ड्यूटी इमानदारी से नहीं करती l बॉस बहुत आग बबूला हो गए थे l डाटकर जी नहीं भरा तो पुरे कर्मचारियों को मीटिंग के लिए बुला लिया l मीटिंग क्या था बस भड़ास निकालना था l बॉस गुस्से में बोलते गए ......चार घंटो में मिसेस सान्याल आप काम पूरा नहीं कर सकी जबकि मैंने इमेडीइटली पुट अप करने को कहा था ,मिसेस सान्याल बोली सर मुझे मिसेस बरुआ ने लेटर ही नहीं दिया तो मैं क्या करती ? अब बॉस मिसेस बरुआ की और मुखातिब होकर कहने लगे - " सो मिसेस बरुआ , मुझे आप से यह कतई उम्मीद नहीं थी l एक छोटा सा काम भी आप से नहीं होता , सरकार हमें काम के लिए पैसे देते हैं , यदि हम काम ही नहीं करेंगे तो यह सरासर धोखा करना हुआ ! हमें तो फिल्ड में भी देखना पड़ता हैं और आपलोगों से आराम का काम भी नहीं होता ? मुझे बहुत बुरा लगा , इसका मतलब आपलोग अपनी जिम्मेदारी अच्छे से नहीं करते हैं l बॉस बोलते ही चले गये थे l उन्होंने यह भी नहीं सोचा कि अगले कि बाते सुनी जाए ......मगर मिसेस बरुआ चुप थी .......बिलकुल चुप ........ क्योंकि वह जानती थी की गुस्से की आग में सफाई पेश करने का मतलब हैं आग में घी डालना l क्या हुआ बॉस को लगा की वह काम नहीं करती हैं l पर हकीकत तो उसे पता था ? मीटिंग में सिर्फ बॉस की आवाज गूंजती रही , उन्होंने दूसरे पक्ष का कुछ सुनना जरुरी समझा ही मिसेस बरुआ ने अपनी सफाई पेश करना जरुरी समझी , क्योंकि उसे अपने आप पर भरोसा था , उससे बस काम में ही तो डिले हुआ था , ऐसा कोई अपराध तो नहीं किया था जिससे कि उसे शर्मिंदगी उठानी पड़ रही हो , उसे तो बॉस की इस बर्ताव पर दया रही थी l बहरहाल उसके मष्तिष्क पर मिसेस भंडारी के कहे वह वाक्य गूंज रहा था -" बॉस इज ऑलवेज राईट " l

रीता सिंह "सर्जना "तेजपुर असम


Tuesday, January 31, 2017

तोहफा (कहानी )

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चारु बुआ को आये पांच दिन हो गए हैं l काफी दिन  बाद आई हैं l इसीलिए मम्मी उसकी बड़ी खातिरदारी कर रही हैं l वैसे भी खातिरदारी करने का और एक कारण भी हैं l चारु बुआ धनाढ्य महिला हैं l उनके पति विदेश में रहते है अच्छा -खासा रुपया -पैसा है l घर में कार ,फ्रिज ,टी .वी,वी .सी .आर सभी कुछ तो है l और तो ओर जब फूफाजी भारत आते है तो जाने क्या -क्या सामान लेकर आते है l चारू बुआ मम्मी के लिए कुछ कुछ जरुर लेती आती है l मम्मी के जोर देने पर चारू बुआ ठहरी हुई है l वह तो कब के जाना चाहती थी l कभी -कभी मम्मी पर गुस्सा आने लगता हैं l

"ऐसा क्या हैं चारू बुआ में जो तुम उसकी खातिरदारी में लगी रहती हो ?" एक दिन साहस बटोर  कर मैंने पूछा l ऐसा कहना शायद मम्मी के लिए पसंद ना आई होगी तुनककर बोली "तुमसे मतलब ?" मैं जानती हूँ वे मेरा ब्याह विदेशों में कार्यरत किसी युवक से कराना चाहती हैं l इसलिए मम्मी बुआ के आगे पीछे हमेशा लगी रहती हैं l मगर मुझे मम्मी की यह आचरण बिलकुल पसंद नहीं l वे अच्छी तरह जानती है कि मुझे अपने वतन से कितना प्यार हैं l मेरा समाज सेवा करना उन्हें खटकता हैं l कहती हैं समाज सेवा के बदले में मुझे क्या मिलता हैं ?क्या इसलिए तुझे उच्च शिछा दिलवायी थी ? परन्तु माँ को कौन समझाये कि इस काम से मुझे कितनी आत्म संतुष्टि मिलती हैं l मुझे आडंबर बिलकुल पसंद नहीं l मैं तो सादा जीवन व्यतित करना चाहती हूँ l नजाने चारू बुआ को मम्मी से इतना लगाव क्यों हैं ? वह तो हमारी अपनी बुआ नहीं हैं l हमारी अपनी बुआ तो भक्ति हैं l हाँ भक्ति बुआ ,मुझे बहुत अच्छी लगती हैं उन्हें l जब भी वे यहाँ आती हैं मुझे बेहद ख़ुशी मह्सुस होती l क्योकि कम से कम उनका बिचार मुझसे मिलता हैं l कौन नहीं जानता भक्ति बुआ को मानीकपूर इलाके की अच्छी समाज सेविका हैं l पर माँ उन्हें फूटी आखों देख नहीं सकती l वह इसलिए कि उन्होंने माँ के मर्जी के खिलाफ अंतर्जातीय विवाह किया था l माँ को डर हैं कि कही मैं भी भक्ति बुआ कि तरह हो जाऊ l जब वह आती हैं माँ हमारी तरफ कड़ी नजर रखती हैं l मगर पापा बहुत अच्छे हैं l वे कभी भक्ति बुआ के खिलाफ नहीं थे l बीच में माँ ही दीवार बन खड़ी हुई थी l जिसके कारण बुआ को कोर्ट में जाकर शादी करनी पड़ी l मम्मी कि कड़ी नजर से बचकर पापा दोनों को आशीर्वाद देने पहुंचे थे l उस वक्त भक्ति बुआ के आखो से आश्रुधारा निकल पड़ी थी l बाबुल का घर छुट गया l भक्ति बुआ का ससुराल में प्रवेश हुआ l ससुराल की अवस्था ठीक नहीं थी l भक्ति बुआ निराश हुई l अपने बाबुल के घर का सारा सुख त्याग कर उन्होंने संघर्ष का जीवन आरम्भ कर दिया l पढ़ी-लिखी बहु वो भी दुसरे बिरादरी का इतना संघर्षशील ,ऐसी बहु को पाकर सास-ससुर गदगद हो गए l

इसी बीच उन्हें स्कूल में शिक्षिका की नौकरी मिल गयी और पति के वकालती का प्रेक्टिस भी धीरे-धीरे शुरू होने लगा l भक्ति बुआ यूँ ही पढ़कर चुप रहनेवाली में से नहीं थी l उन्होंने समाज सेवा भी शुरू कर दिया l
माँ अब भी भक्ति बुआ को घर आने नहीं देती थी l परन्तु यह जानती थी की पापा चुपके से उनसे मिलते हैं l इसी बात को लेकर दोनों में झगडा हो जाता l हम ड्राइंगरूम में बैठे टी.वी देख रहे थे l टेलीफोन की घंटी घनघना उठी l माँ ने रिसीवर उठाया l माँ के चेहरे का बदलाव हम स्पस्ट देख रहे थे l पापा ने पूछा "क्या बात हैं ?खैरियत तो हैं ?" वे फोन क्रेडिल पे रखती हुई धीरे से बोली -"भक्ति का अस्पताल से फोन था l विशाल का एक्सीडेंट हुआ है l " विशाल मेरा छोटा भाई हैं l बेहद चंचल ,नया-नया स्कूटर चलाना सिखा हैं l हम झटपट अस्पताल के लिए रवाना हो गए l

अस्पताल में जब हम पहुंचे तो पता चला विशाल को आपरेशन थियेटर में ले जाया गया हैं और भक्ति बुआ आपरेशन थियेटर के बाहर खड़ी हैं l माँ रोये जा रही थी l पापा ने बुआ से पूछा -यह सब कैसे हुआ ?"

मैं स्कूल से रही थी l रास्ते में काफी भीड़ थी l मैंने माजरा क्या हैं यह जान्ने के लिए उधर नजरे दौड़ाई तो देखा विशाल बेहोश पड़ा हैं l उसके स्कूटर को कार से टक्कर लगी थी l फिर झट पट उसे उठाकर अस्पताल लाकर घर फोन कर दी l माँ रो रही थी l मैं ईश्वर को स्मरण कर रही थी l सभी डॉक्टर का इन्तजार कर रहे थे l अचानक डॉक्टर आपरेशन थियेटर से बाहर निकलकर आये l भक्ति बुआ सभी को धांधस बंधा रही थी l डॉक्टर को देखकर वह पूछने के लिए लपकी l
"डॉक्टर साहब अब वह कैसा हैं ?"
"डरने की कोई बात नहीं ,अब वह खतरे से बाहर हैं l "
विशाल बच गया l सभी ने ईश्वर को लाख-लाख धन्यवाद दिया l इस हादसे के बाद माँ भक्ति बुआ के प्रति थोडा नर्म हुई l आने-जाने का सिलसिला शुरू हुआ पर जितनी चारु बुआ के पीछे भागती हैं उतना भक्ति बुआ का आदर यहाँ कभी नहीं हुआ l

माँ आज उदास हैं l क्योंकि चारुबुआ आज जा रही हैं l फिर जाने कब आएगी l मम्मी चारुबुआ को मेरे लिए लड़का देखने की बात स्मरण करा रही हैं औत चारुबुआ निश्चिन्त होने के लिए आश्वासन दे रही हैं l चारु बुआ चली गयी l फिर सब कुछ पहले की तरह सामान्य हो गयी l
करीब तिन महीने बाद चारु बुआ का एक लंबा पत्र आया l पत्र पढ़कर मम्मी ख़ुशी से उछल पड़ी l मुझे शक हुआ हो हो मेरे लिए लड़के की बात लिखी होगी l मैंने उन्हें पापा से कहते सूना - " अजी सुन रहे हो चारु जीजी ने हमारी श्रुति के लिए एक लड़का देखा हैं l लड़का अमेरिका में इंजिनियर हैं l दान दहेज़ का भी कोई झमेला नहीं l बस लड़की पढ़ी-लिखी व् सुन्दर होनी चाहिए l हमारे तो भाग खुल गए l लड़का मिला वह भी अपनी बिरादरी का l माँ के जैसे पर निकल आये हो l मम्मी बस अपनी ही कहती जा रही थी l "कुछ कहते क्यों नहीं ?" पापा को चुप होते देख मम्मी ने कहा l

"क्या कहू,तुम तब से अपनी ही कह रही हो l " पापा ने मम्मी को समझाते हुए कहा - "इतना खुश होना ठीक नहीं l हमें श्रुति की राय भी जाननी चाहिए l वैसे भी आज विदेशो में भारतीय कितने बेटियों को प्रताड़ित होना पड़ता हैं l यह जानते हुए भी तुम अपनी बेटी को ..........दुःख की बात हैं l शायद मम्मी को पापा का ऐसा कहना अच्छा नहीं लगा l वह भुन भुनाती हुई किचेन की तरफ चली गई l
रात को खाने की मेज में मम्मी ने साफ़ ऐलान किया क़ि वे चारु बुआ के भेजे रिश्ते को स्वीकार करती हैं l पापा चुप थे l मैं भी चुप रही l सिर्फ मम्मी जाने क्या-क्या बकती रही l
मैं बालकनी पर कड़ी थी l पापा भी वही गए l पापा कहने लगे -बेटा तुम अपनी मम्मी की बात का बुरा मत मानना l मैं उसे धीरे-धीरे समझा लूँगा l पापा जानते हैं क़ि मुझे अमित पसंद हैं l
दुसरे दिन मेरा भक्ति बुआ के घर जाना हुआ l बातों ही बातों में बुआ ने अमित के बारे में पूछा l उन्हें भी पता हैं क़ी मैं और अमित एक दुसरे को चाहते हैं l एक बार बुआ अमित से मिली भी थी l
अमित का सौम्य व्यक्तित्व देख बुआ फुले नहीं समाई थी l
मैंने बुआ को कल वाली बात बतायी l चिंतित होकर बोली- "अमित कुछ दिनों के लिए बाहर गया हुआ हैं l " भक्ति बुआ ने मुझे धांढस बढाया क़ी वह मेरे लिए मम्मी से लड़ेगी l

भक्ति बुआ जब भी हमारे घर आती हैं l मम्मी औपोचारिकता के खातिर थोडा बहुत बोल लेती हैं l बुआ ने मौका देखकर मम्मी से बात छेडी l
"भाभी सूना हैं ,हमारी श्रुति के लिए लड़का देखा हैं ?"

"हाँ ,लड़का अमेरिका में सेटल हैं l "मम्मी खुश होती हुई बोली l
"क्या आपने लड़का देखा हैं ?"
"लड़का क्या देखना l खाते-पिते घर का हैं ,विदेश में रहता हैं और क्या चाहिए हमें,हमारी श्रुति तो राज करेगी राज हाँ l "
"मगर भाभी ?"
"मगर-वगर कुछ नहीं,मैं तो वही श्रुति की शादी कर दूंगी l मम्मी ने जैसे ऐलान कर दिया l मम्मी ने चारुबुआ को ख़त दल दिया क़ी उन्हें यह रिश्ता मंजूर हैं l
इसके कई रोज बाद भक्ति बुआ हमारे घर आई l साथ में एक सुन्दर युवती थी l मम्मी क़ी उत्सुकता पूर्ण नजरे बुआ ने देख लिए l भक्ति बुआ कुछ कहे, इससे पहले ही वह युवती बोल पड़ी l
"माँ जी, मैं हाथ जोडती हूँ क़ी श्रुति की शादी अरुण से करे l आप जिस विदेशी चकाचौध से प्रभावित होकर श्रुति का विवाह करने जा रही ,वह अस्थाई हैं l अरुण ने मुझसे शादी क़ी थी l अमेरिका ले गया l मगर कुछ ही दिनों के बाद मुझे उसका असली चेहरा मालुम हुआ l मेरी जिंदगी का वह सबसे बुरा दिन यह था क़ी अरुण पहले से ही शादी-शुदा था l मेरे माता-पिता ने विदेशी चमक में यह देखना भूल गए क़ी उस व्यक्ति के व्यक्तित्व कितना गन्दा हैं l साल भर पहले मेरा उनसे तलाक हुआ हैं l
इसीलिए जब मैंने सूना क़ी एक लड़की क़ी जिंदगी फिर उजड़ने वाली हैं तो मैं रह पायी l यह तो भक्ति जी का शुकर हैं क़ी मेरी मुलाकात उनसे हो गई l
मम्मी को जैसे बिच्छु ने डंक मार ली हो l जैसे उनकी कानों में विश्वास ही नहीं हुआ l उन्हें लगा होगा बेटी का अच्छा रिश्ता देखकर सभी जल रहे हैं l
लेकिन भक्ति बुआ के साथ उस युवती का आना मुझे बहुत अच्छा लगा l भगवान् जैसे मेरी लाज बचाने भेजा हो l अमित में क्या कमी हैं ? पढ़ा -लिखा है l अच्छा खासा नौकरी हैं ,समझदार हैं और सबसे बड़ी बात तो यह हैं की वह मुझे समझता हैं l हमारे विचार मिलते हैं l मगर मम्मी ! वह क्या चाहती हैं ? रुपया -पैसा ! भक्ति बुआ के चले जाने पर मम्मी को थोडा गंभीर होते मैंने देखा l
पहले जैसा पापा से इस विषय पर बाते करते नहीं देखी l
एक रोज मम्मी चारु बुआ के घर से लौटी l उन्होंने तार भेजकर उन्हें बुलाया था l शायद कोई गंभीर बाते होगी l वर्ना मम्मी को क्यों बुलवाती l मम्मी चारु बुआ के घर से लौटकर गंभीर दीख रही थी l
सोफे पर बैठते हुए मम्मी ने कहा -
"बेटा जरा एक ग्लास पानी पिलाना l " मम्मी का बदलाव मुझे आश्चर्य कर गया l पानी का ग्लास मम्मी को थमाते हुए मैंने पूछा -
"क्या बात हैं मम्मी आप इतनी परेशान दीख रही हो ?"
लम्बी सांस छोड़ते हुए मम्मी ने मेरी तरफ देखा फिर जो कहा वह सुनकर मैं दंग रह गई l यह कैसे हुआ ? चारु बुआ और फूफाजी का महीने भर पहले तलाक हो गया था ,फूफाजी ने वही एक विदेशी लड़की से ब्याह रचा लिया हैं l यह सुन दिल को काफी धक्का लगा l
मम्मी ने प्यार से कहा - "बेटा ,एकदिन अमित को घर बुलाना l अपने ही मुल्क के चमकते हीरे को मैं विदेशी चकाचौध में देख नहीं पायी थी l माँ को जैसे आज पश्चताप हो रहा था l
माँ का यह प्यार भरा रूप मैंने पहले कभी नहीं देखा था l सोच रही हूँ मम्मी का अमित से मिलने की ललक मेरे लिए एक खुबसूरत तोहफा तो नहीं ?

रीता सिंह"सर्जना"
मार्फतः डी एफ ' ऑफिस
पोः कलियाभोमोरा
दोलाबारी
तेजपुर (असम)
पिनः 784027
email:-rita30singh@gmail.com