तोहफा (कहानी )
***********
चारु बुआ को
आये पांच दिन
हो गए हैं
l काफी दिन
बाद आई हैं
l इसीलिए मम्मी उसकी बड़ी
खातिरदारी कर रही
हैं l वैसे भी
खातिरदारी करने का
और एक कारण
भी हैं l चारु
बुआ धनाढ्य महिला
हैं l उनके पति
विदेश में रहते
है अच्छा -खासा
रुपया -पैसा है
l घर में कार
,फ्रिज ,टी .वी,वी .सी
.आर सभी कुछ
तो है l और
तो ओर जब
फूफाजी भारत आते
है तो न
जाने क्या -क्या
सामान लेकर आते
है l चारू बुआ
मम्मी के लिए
कुछ न कुछ
जरुर लेती आती
है l मम्मी के
जोर देने पर
चारू बुआ ठहरी
हुई है l वह
तो कब के
जाना चाहती थी
l कभी -कभी मम्मी
पर गुस्सा आने
लगता हैं l
"ऐसा क्या हैं
चारू बुआ में
जो तुम उसकी
खातिरदारी में लगी
रहती हो ?" एक
दिन साहस बटोर कर
मैंने पूछा l ऐसा
कहना शायद मम्मी
के लिए पसंद
ना आई होगी
तुनककर बोली "तुमसे मतलब
?" मैं जानती हूँ वे
मेरा ब्याह विदेशों
में कार्यरत किसी
युवक से कराना
चाहती हैं l इसलिए
मम्मी बुआ के
आगे पीछे हमेशा
लगी रहती हैं
l मगर मुझे मम्मी
की यह आचरण
बिलकुल पसंद नहीं
l वे अच्छी तरह
जानती है कि
मुझे अपने वतन
से कितना प्यार
हैं l मेरा समाज
सेवा करना उन्हें
खटकता हैं l कहती
हैं समाज सेवा
के बदले में
मुझे क्या मिलता
हैं ?क्या इसलिए
तुझे उच्च शिछा
दिलवायी थी ? परन्तु
माँ को कौन
समझाये कि इस
काम से मुझे
कितनी आत्म संतुष्टि
मिलती हैं l मुझे
आडंबर बिलकुल पसंद
नहीं l मैं तो
सादा जीवन व्यतित
करना चाहती हूँ
l नजाने चारू बुआ
को मम्मी से
इतना लगाव क्यों
हैं ? वह तो
हमारी अपनी बुआ
नहीं हैं l हमारी
अपनी बुआ तो
भक्ति हैं l हाँ
भक्ति बुआ ,मुझे
बहुत अच्छी लगती
हैं उन्हें l जब
भी वे यहाँ
आती हैं मुझे
बेहद ख़ुशी मह्सुस
होती l क्योकि कम से
कम उनका बिचार
मुझसे मिलता हैं
l कौन नहीं जानता
भक्ति बुआ को
मानीकपूर इलाके की अच्छी
समाज सेविका हैं
l पर माँ उन्हें
फूटी आखों देख
नहीं सकती l वह
इसलिए कि उन्होंने
माँ के मर्जी
के खिलाफ अंतर्जातीय
विवाह किया था
l माँ को डर
हैं कि कही
मैं भी भक्ति
बुआ कि तरह
न हो जाऊ
l जब वह आती
हैं माँ हमारी
तरफ कड़ी नजर
रखती हैं l मगर
पापा बहुत अच्छे
हैं l वे कभी
भक्ति बुआ के
खिलाफ नहीं थे
l बीच में माँ
ही दीवार बन
खड़ी हुई थी
l जिसके कारण बुआ
को कोर्ट में
जाकर शादी करनी
पड़ी l मम्मी कि
कड़ी नजर से
बचकर पापा दोनों
को आशीर्वाद देने
पहुंचे थे l उस
वक्त भक्ति बुआ
के आखो से
आश्रुधारा निकल पड़ी
थी l बाबुल का
घर छुट गया
l भक्ति बुआ का
ससुराल में प्रवेश
हुआ l ससुराल की
अवस्था ठीक नहीं
थी l भक्ति बुआ
निराश न हुई
l अपने बाबुल के घर
का सारा सुख
त्याग कर उन्होंने
संघर्ष का जीवन
आरम्भ कर दिया
l पढ़ी-लिखी बहु
वो भी दुसरे
बिरादरी का इतना
संघर्षशील ,ऐसी बहु
को पाकर सास-ससुर गदगद
हो गए l
इसी बीच उन्हें
स्कूल में शिक्षिका
की नौकरी मिल
गयी और पति
के वकालती का
प्रेक्टिस भी धीरे-धीरे शुरू
होने लगा l भक्ति
बुआ यूँ ही
पढ़कर चुप रहनेवाली
में से नहीं
थी l उन्होंने समाज
सेवा भी शुरू
कर दिया l
माँ अब भी
भक्ति बुआ को
घर आने नहीं
देती थी l परन्तु
यह जानती थी
की पापा चुपके
से उनसे मिलते
हैं l इसी बात
को लेकर दोनों
में झगडा हो
जाता l हम ड्राइंगरूम
में बैठे टी.वी देख
रहे थे l टेलीफोन
की घंटी घनघना
उठी l माँ ने
रिसीवर उठाया l माँ के
चेहरे का बदलाव
हम स्पस्ट देख
रहे थे l पापा
ने पूछा "क्या
बात हैं ?खैरियत
तो हैं न
?" वे फोन क्रेडिल
पे रखती हुई
धीरे से बोली
-"भक्ति का अस्पताल
से फोन था
l विशाल का एक्सीडेंट
हुआ है l " विशाल
मेरा छोटा भाई
हैं l बेहद चंचल
,नया-नया स्कूटर
चलाना सिखा हैं
l हम झटपट अस्पताल
के लिए रवाना
हो गए l
अस्पताल में जब
हम पहुंचे तो
पता चला विशाल
को आपरेशन थियेटर
में ले जाया
गया हैं और
भक्ति बुआ आपरेशन
थियेटर के बाहर
खड़ी हैं l माँ
रोये जा रही
थी l पापा ने
बुआ से पूछा
-यह सब कैसे
हुआ ?"
मैं स्कूल से आ
रही थी l रास्ते
में काफी भीड़
थी l मैंने माजरा
क्या हैं यह
जान्ने के लिए
उधर नजरे दौड़ाई
तो देखा विशाल
बेहोश पड़ा हैं
l उसके स्कूटर को कार
से टक्कर लगी
थी l फिर झट
पट उसे उठाकर
अस्पताल लाकर घर
फोन कर दी
l माँ रो रही
थी l मैं ईश्वर
को स्मरण कर
रही थी l सभी
डॉक्टर का इन्तजार
कर रहे थे
l अचानक डॉक्टर आपरेशन थियेटर
से बाहर निकलकर
आये l भक्ति बुआ
सभी को धांधस
बंधा रही थी
l डॉक्टर को देखकर
वह पूछने के
लिए लपकी l
"डॉक्टर
साहब अब वह
कैसा हैं ?"
"डरने
की कोई बात
नहीं ,अब वह
खतरे से बाहर
हैं l "
विशाल बच गया
l सभी ने ईश्वर
को लाख-लाख
धन्यवाद दिया l इस हादसे
के बाद माँ
भक्ति बुआ के
प्रति थोडा नर्म
हुई l आने-जाने
का सिलसिला शुरू
हुआ पर जितनी
चारु बुआ के
पीछे भागती हैं
उतना भक्ति बुआ
का आदर यहाँ
कभी नहीं हुआ
l
माँ आज उदास
हैं l क्योंकि चारुबुआ
आज जा रही
हैं l फिर न
जाने कब आएगी
l मम्मी चारुबुआ को मेरे
लिए लड़का देखने
की बात स्मरण
करा रही हैं
औत चारुबुआ निश्चिन्त
होने के लिए
आश्वासन दे रही
हैं l चारु बुआ
चली गयी l फिर
सब कुछ पहले
की तरह सामान्य
हो गयी l
करीब तिन महीने
बाद चारु बुआ
का एक लंबा
पत्र आया l पत्र
पढ़कर मम्मी ख़ुशी
से उछल पड़ी
l मुझे शक हुआ
हो न हो
मेरे लिए लड़के
की बात लिखी
होगी l मैंने उन्हें पापा
से कहते सूना
- " अजी सुन रहे
हो चारु जीजी
ने हमारी श्रुति
के लिए एक
लड़का देखा हैं
l लड़का अमेरिका में इंजिनियर
हैं l दान दहेज़
का भी कोई
झमेला नहीं l बस
लड़की पढ़ी-लिखी
व् सुन्दर होनी
चाहिए l हमारे तो भाग
खुल गए l लड़का
मिला वह भी
अपनी बिरादरी का
l माँ के जैसे
पर निकल आये
हो l मम्मी बस
अपनी ही कहती
जा रही थी
l "कुछ कहते क्यों
नहीं ?" पापा को
चुप होते देख
मम्मी ने कहा
l
"क्या
कहू,तुम तब
से अपनी ही
कह रही हो
l " पापा ने मम्मी
को समझाते हुए
कहा - "इतना खुश
होना ठीक नहीं
l हमें श्रुति की राय
भी जाननी चाहिए
l वैसे भी आज
विदेशो में भारतीय
कितने बेटियों को
प्रताड़ित होना पड़ता
हैं l यह जानते
हुए भी तुम
अपनी बेटी को
..........दुःख की बात
हैं l शायद मम्मी
को पापा का
ऐसा कहना अच्छा
नहीं लगा l वह
भुन भुनाती हुई
किचेन की तरफ
चली गई l
रात को खाने
की मेज में
मम्मी ने साफ़
ऐलान किया क़ि
वे चारु बुआ
के भेजे रिश्ते
को स्वीकार करती
हैं l पापा चुप
थे l मैं भी
चुप रही l सिर्फ
मम्मी न जाने
क्या-क्या बकती
रही l
मैं बालकनी पर कड़ी
थी l पापा भी
वही आ गए
l पापा कहने लगे
-बेटा तुम अपनी
मम्मी की बात
का बुरा मत
मानना l मैं उसे
धीरे-धीरे समझा
लूँगा l पापा जानते
हैं क़ि मुझे
अमित पसंद हैं
l
दुसरे दिन मेरा
भक्ति बुआ के
घर जाना हुआ
l बातों ही बातों
में बुआ ने
अमित के बारे
में पूछा l उन्हें
भी पता हैं
क़ी मैं और
अमित एक दुसरे
को चाहते हैं
l एक बार बुआ
अमित से मिली
भी थी l
अमित का सौम्य
व्यक्तित्व देख बुआ
फुले नहीं समाई
थी l
मैंने बुआ को
कल वाली बात
बतायी l चिंतित होकर बोली-
"अमित कुछ दिनों
के लिए बाहर
गया हुआ हैं
l " भक्ति बुआ ने
मुझे धांढस बढाया
क़ी वह मेरे
लिए मम्मी से
लड़ेगी l
भक्ति बुआ जब
भी हमारे घर
आती हैं l मम्मी
औपोचारिकता के खातिर
थोडा बहुत बोल
लेती हैं l बुआ
ने मौका देखकर
मम्मी से बात
छेडी l
"भाभी
सूना हैं ,हमारी
श्रुति के लिए
लड़का देखा हैं
?"
"हाँ
,लड़का अमेरिका में सेटल
हैं l "मम्मी खुश होती
हुई बोली l
"क्या
आपने लड़का देखा
हैं ?"
"लड़का
क्या देखना l खाते-पिते घर
का हैं ,विदेश
में रहता हैं
और क्या चाहिए
हमें,हमारी श्रुति
तो राज करेगी
राज हाँ l "
"मगर भाभी ?"
"मगर-वगर कुछ
नहीं,मैं तो
वही श्रुति की
शादी कर दूंगी
l मम्मी ने जैसे
ऐलान कर दिया
l मम्मी ने चारुबुआ
को ख़त दल
दिया क़ी उन्हें
यह रिश्ता मंजूर
हैं l
इसके कई रोज
बाद भक्ति बुआ
हमारे घर आई
l साथ में एक
सुन्दर युवती थी l मम्मी
क़ी उत्सुकता पूर्ण
नजरे बुआ ने
देख लिए l भक्ति
बुआ कुछ कहे,
इससे पहले ही
वह युवती बोल
पड़ी l
"माँ जी, मैं
हाथ जोडती हूँ
क़ी श्रुति की
शादी अरुण से
न करे l आप
जिस विदेशी चकाचौध
से प्रभावित होकर
श्रुति का विवाह
करने जा रही
,वह अस्थाई हैं
l अरुण ने मुझसे
शादी क़ी थी
l अमेरिका ले गया
l मगर कुछ ही
दिनों के बाद
मुझे उसका असली
चेहरा मालुम हुआ
l मेरी जिंदगी का वह
सबसे बुरा दिन
यह था क़ी
अरुण पहले से
ही शादी-शुदा
था l मेरे माता-पिता ने
विदेशी चमक में
यह देखना भूल
गए क़ी उस
व्यक्ति के व्यक्तित्व
कितना गन्दा हैं
l साल भर पहले
मेरा उनसे तलाक
हुआ हैं l
इसीलिए जब मैंने
सूना क़ी एक
लड़की क़ी जिंदगी
फिर उजड़ने वाली
हैं तो मैं
रह न पायी
l यह तो भक्ति
जी का शुकर
हैं क़ी मेरी
मुलाकात उनसे हो
गई l
मम्मी को जैसे
बिच्छु ने डंक
मार ली हो
l जैसे उनकी कानों
में विश्वास ही
नहीं हुआ l उन्हें
लगा होगा बेटी
का अच्छा रिश्ता
देखकर सभी जल
रहे हैं l
लेकिन भक्ति बुआ के
साथ उस युवती
का आना मुझे
बहुत अच्छा लगा
l भगवान् जैसे मेरी
लाज बचाने भेजा
हो l अमित में
क्या कमी हैं
? पढ़ा -लिखा है
l अच्छा खासा नौकरी
हैं ,समझदार हैं
और सबसे बड़ी
बात तो यह
हैं की वह
मुझे समझता हैं
l हमारे विचार मिलते हैं
l मगर मम्मी ! वह
क्या चाहती हैं
? रुपया -पैसा ! भक्ति बुआ
के चले जाने
पर मम्मी को
थोडा गंभीर होते
मैंने देखा l
पहले जैसा पापा
से इस विषय
पर बाते करते
नहीं देखी l
एक रोज मम्मी
चारु बुआ के
घर से लौटी
l उन्होंने तार भेजकर
उन्हें बुलाया था l शायद
कोई गंभीर बाते
होगी l वर्ना मम्मी को
क्यों बुलवाती l मम्मी
चारु बुआ के
घर से लौटकर
गंभीर दीख रही
थी l
सोफे पर बैठते
हुए मम्मी ने
कहा -
"बेटा
जरा एक ग्लास
पानी पिलाना l " मम्मी
का बदलाव मुझे
आश्चर्य कर गया
l पानी का ग्लास
मम्मी को थमाते
हुए मैंने पूछा
-
"क्या
बात हैं मम्मी
आप इतनी परेशान
दीख रही हो
?"
लम्बी सांस छोड़ते
हुए मम्मी ने
मेरी तरफ देखा
फिर जो कहा
वह सुनकर मैं
दंग रह गई
l यह कैसे हुआ
? चारु बुआ और
फूफाजी का महीने
भर पहले तलाक
हो गया था
,फूफाजी ने वही
एक विदेशी लड़की
से ब्याह रचा
लिया हैं l यह
सुन दिल को
काफी धक्का लगा
l
मम्मी ने प्यार
से कहा - "बेटा
,एकदिन अमित को
घर बुलाना l अपने
ही मुल्क के
चमकते हीरे को
मैं विदेशी चकाचौध
में देख नहीं
पायी थी l माँ
को जैसे आज
पश्चताप हो रहा
था l
माँ का यह
प्यार भरा रूप
मैंने पहले कभी
नहीं देखा था
l सोच रही हूँ
मम्मी का अमित
से मिलने की
ललक मेरे लिए
एक खुबसूरत तोहफा
तो नहीं ?
रीता सिंह"सर्जना"
मार्फतः डी एफ
ओ'ज ऑफिस
पोः कलियाभोमोरा
दोलाबारी
तेजपुर (असम)
पिनः
784027
email:-rita30singh@gmail.com
तोहफा (कहानी )
***********
चारु बुआ को
आये पांच दिन
हो गए हैं
l काफी दिन
बाद आई हैं
l इसीलिए मम्मी उसकी बड़ी
खातिरदारी कर रही
हैं l वैसे भी
खातिरदारी करने का
और एक कारण
भी हैं l चारु
बुआ धनाढ्य महिला
हैं l उनके पति
विदेश में रहते
है अच्छा -खासा
रुपया -पैसा है
l घर में कार
,फ्रिज ,टी .वी,वी .सी
.आर सभी कुछ
तो है l और
तो ओर जब
फूफाजी भारत आते
है तो न
जाने क्या -क्या
सामान लेकर आते
है l चारू बुआ
मम्मी के लिए
कुछ न कुछ
जरुर लेती आती
है l मम्मी के
जोर देने पर
चारू बुआ ठहरी
हुई है l वह
तो कब के
जाना चाहती थी
l कभी -कभी मम्मी
पर गुस्सा आने
लगता हैं l
"ऐसा क्या हैं
चारू बुआ में
जो तुम उसकी
खातिरदारी में लगी
रहती हो ?" एक
दिन साहस बटोर कर
मैंने पूछा l ऐसा
कहना शायद मम्मी
के लिए पसंद
ना आई होगी
तुनककर बोली "तुमसे मतलब
?" मैं जानती हूँ वे
मेरा ब्याह विदेशों
में कार्यरत किसी
युवक से कराना
चाहती हैं l इसलिए
मम्मी बुआ के
आगे पीछे हमेशा
लगी रहती हैं
l मगर मुझे मम्मी
की यह आचरण
बिलकुल पसंद नहीं
l वे अच्छी तरह
जानती है कि
मुझे अपने वतन
से कितना प्यार
हैं l मेरा समाज
सेवा करना उन्हें
खटकता हैं l कहती
हैं समाज सेवा
के बदले में
मुझे क्या मिलता
हैं ?क्या इसलिए
तुझे उच्च शिछा
दिलवायी थी ? परन्तु
माँ को कौन
समझाये कि इस
काम से मुझे
कितनी आत्म संतुष्टि
मिलती हैं l मुझे
आडंबर बिलकुल पसंद
नहीं l मैं तो
सादा जीवन व्यतित
करना चाहती हूँ
l नजाने चारू बुआ
को मम्मी से
इतना लगाव क्यों
हैं ? वह तो
हमारी अपनी बुआ
नहीं हैं l हमारी
अपनी बुआ तो
भक्ति हैं l हाँ
भक्ति बुआ ,मुझे
बहुत अच्छी लगती
हैं उन्हें l जब
भी वे यहाँ
आती हैं मुझे
बेहद ख़ुशी मह्सुस
होती l क्योकि कम से
कम उनका बिचार
मुझसे मिलता हैं
l कौन नहीं जानता
भक्ति बुआ को
मानीकपूर इलाके की अच्छी
समाज सेविका हैं
l पर माँ उन्हें
फूटी आखों देख
नहीं सकती l वह
इसलिए कि उन्होंने
माँ के मर्जी
के खिलाफ अंतर्जातीय
विवाह किया था
l माँ को डर
हैं कि कही
मैं भी भक्ति
बुआ कि तरह
न हो जाऊ
l जब वह आती
हैं माँ हमारी
तरफ कड़ी नजर
रखती हैं l मगर
पापा बहुत अच्छे
हैं l वे कभी
भक्ति बुआ के
खिलाफ नहीं थे
l बीच में माँ
ही दीवार बन
खड़ी हुई थी
l जिसके कारण बुआ
को कोर्ट में
जाकर शादी करनी
पड़ी l मम्मी कि
कड़ी नजर से
बचकर पापा दोनों
को आशीर्वाद देने
पहुंचे थे l उस
वक्त भक्ति बुआ
के आखो से
आश्रुधारा निकल पड़ी
थी l बाबुल का
घर छुट गया
l भक्ति बुआ का
ससुराल में प्रवेश
हुआ l ससुराल की
अवस्था ठीक नहीं
थी l भक्ति बुआ
निराश न हुई
l अपने बाबुल के घर
का सारा सुख
त्याग कर उन्होंने
संघर्ष का जीवन
आरम्भ कर दिया
l पढ़ी-लिखी बहु
वो भी दुसरे
बिरादरी का इतना
संघर्षशील ,ऐसी बहु
को पाकर सास-ससुर गदगद
हो गए l
इसी बीच उन्हें
स्कूल में शिक्षिका
की नौकरी मिल
गयी और पति
के वकालती का
प्रेक्टिस भी धीरे-धीरे शुरू
होने लगा l भक्ति
बुआ यूँ ही
पढ़कर चुप रहनेवाली
में से नहीं
थी l उन्होंने समाज
सेवा भी शुरू
कर दिया l
माँ अब भी
भक्ति बुआ को
घर आने नहीं
देती थी l परन्तु
यह जानती थी
की पापा चुपके
से उनसे मिलते
हैं l इसी बात
को लेकर दोनों
में झगडा हो
जाता l हम ड्राइंगरूम
में बैठे टी.वी देख
रहे थे l टेलीफोन
की घंटी घनघना
उठी l माँ ने
रिसीवर उठाया l माँ के
चेहरे का बदलाव
हम स्पस्ट देख
रहे थे l पापा
ने पूछा "क्या
बात हैं ?खैरियत
तो हैं न
?" वे फोन क्रेडिल
पे रखती हुई
धीरे से बोली
-"भक्ति का अस्पताल
से फोन था
l विशाल का एक्सीडेंट
हुआ है l " विशाल
मेरा छोटा भाई
हैं l बेहद चंचल
,नया-नया स्कूटर
चलाना सिखा हैं
l हम झटपट अस्पताल
के लिए रवाना
हो गए l
अस्पताल में जब
हम पहुंचे तो
पता चला विशाल
को आपरेशन थियेटर
में ले जाया
गया हैं और
भक्ति बुआ आपरेशन
थियेटर के बाहर
खड़ी हैं l माँ
रोये जा रही
थी l पापा ने
बुआ से पूछा
-यह सब कैसे
हुआ ?"
मैं स्कूल से आ
रही थी l रास्ते
में काफी भीड़
थी l मैंने माजरा
क्या हैं यह
जान्ने के लिए
उधर नजरे दौड़ाई
तो देखा विशाल
बेहोश पड़ा हैं
l उसके स्कूटर को कार
से टक्कर लगी
थी l फिर झट
पट उसे उठाकर
अस्पताल लाकर घर
फोन कर दी
l माँ रो रही
थी l मैं ईश्वर
को स्मरण कर
रही थी l सभी
डॉक्टर का इन्तजार
कर रहे थे
l अचानक डॉक्टर आपरेशन थियेटर
से बाहर निकलकर
आये l भक्ति बुआ
सभी को धांधस
बंधा रही थी
l डॉक्टर को देखकर
वह पूछने के
लिए लपकी l
"डॉक्टर
साहब अब वह
कैसा हैं ?"
"डरने
की कोई बात
नहीं ,अब वह
खतरे से बाहर
हैं l "
विशाल बच गया
l सभी ने ईश्वर
को लाख-लाख
धन्यवाद दिया l इस हादसे
के बाद माँ
भक्ति बुआ के
प्रति थोडा नर्म
हुई l आने-जाने
का सिलसिला शुरू
हुआ पर जितनी
चारु बुआ के
पीछे भागती हैं
उतना भक्ति बुआ
का आदर यहाँ
कभी नहीं हुआ
l
माँ आज उदास
हैं l क्योंकि चारुबुआ
आज जा रही
हैं l फिर न
जाने कब आएगी
l मम्मी चारुबुआ को मेरे
लिए लड़का देखने
की बात स्मरण
करा रही हैं
औत चारुबुआ निश्चिन्त
होने के लिए
आश्वासन दे रही
हैं l चारु बुआ
चली गयी l फिर
सब कुछ पहले
की तरह सामान्य
हो गयी l
करीब तिन महीने
बाद चारु बुआ
का एक लंबा
पत्र आया l पत्र
पढ़कर मम्मी ख़ुशी
से उछल पड़ी
l मुझे शक हुआ
हो न हो
मेरे लिए लड़के
की बात लिखी
होगी l मैंने उन्हें पापा
से कहते सूना
- " अजी सुन रहे
हो चारु जीजी
ने हमारी श्रुति
के लिए एक
लड़का देखा हैं
l लड़का अमेरिका में इंजिनियर
हैं l दान दहेज़
का भी कोई
झमेला नहीं l बस
लड़की पढ़ी-लिखी
व् सुन्दर होनी
चाहिए l हमारे तो भाग
खुल गए l लड़का
मिला वह भी
अपनी बिरादरी का
l माँ के जैसे
पर निकल आये
हो l मम्मी बस
अपनी ही कहती
जा रही थी
l "कुछ कहते क्यों
नहीं ?" पापा को
चुप होते देख
मम्मी ने कहा
l
"क्या
कहू,तुम तब
से अपनी ही
कह रही हो
l " पापा ने मम्मी
को समझाते हुए
कहा - "इतना खुश
होना ठीक नहीं
l हमें श्रुति की राय
भी जाननी चाहिए
l वैसे भी आज
विदेशो में भारतीय
कितने बेटियों को
प्रताड़ित होना पड़ता
हैं l यह जानते
हुए भी तुम
अपनी बेटी को
..........दुःख की बात
हैं l शायद मम्मी
को पापा का
ऐसा कहना अच्छा
नहीं लगा l वह
भुन भुनाती हुई
किचेन की तरफ
चली गई l
रात को खाने
की मेज में
मम्मी ने साफ़
ऐलान किया क़ि
वे चारु बुआ
के भेजे रिश्ते
को स्वीकार करती
हैं l पापा चुप
थे l मैं भी
चुप रही l सिर्फ
मम्मी न जाने
क्या-क्या बकती
रही l
मैं बालकनी पर कड़ी
थी l पापा भी
वही आ गए
l पापा कहने लगे
-बेटा तुम अपनी
मम्मी की बात
का बुरा मत
मानना l मैं उसे
धीरे-धीरे समझा
लूँगा l पापा जानते
हैं क़ि मुझे
अमित पसंद हैं
l
दुसरे दिन मेरा
भक्ति बुआ के
घर जाना हुआ
l बातों ही बातों
में बुआ ने
अमित के बारे
में पूछा l उन्हें
भी पता हैं
क़ी मैं और
अमित एक दुसरे
को चाहते हैं
l एक बार बुआ
अमित से मिली
भी थी l
अमित का सौम्य
व्यक्तित्व देख बुआ
फुले नहीं समाई
थी l
मैंने बुआ को
कल वाली बात
बतायी l चिंतित होकर बोली-
"अमित कुछ दिनों
के लिए बाहर
गया हुआ हैं
l " भक्ति बुआ ने
मुझे धांढस बढाया
क़ी वह मेरे
लिए मम्मी से
लड़ेगी l
भक्ति बुआ जब
भी हमारे घर
आती हैं l मम्मी
औपोचारिकता के खातिर
थोडा बहुत बोल
लेती हैं l बुआ
ने मौका देखकर
मम्मी से बात
छेडी l
"भाभी
सूना हैं ,हमारी
श्रुति के लिए
लड़का देखा हैं
?"
"हाँ
,लड़का अमेरिका में सेटल
हैं l "मम्मी खुश होती
हुई बोली l
"क्या
आपने लड़का देखा
हैं ?"
"लड़का
क्या देखना l खाते-पिते घर
का हैं ,विदेश
में रहता हैं
और क्या चाहिए
हमें,हमारी श्रुति
तो राज करेगी
राज हाँ l "
"मगर भाभी ?"
"मगर-वगर कुछ
नहीं,मैं तो
वही श्रुति की
शादी कर दूंगी
l मम्मी ने जैसे
ऐलान कर दिया
l मम्मी ने चारुबुआ
को ख़त दल
दिया क़ी उन्हें
यह रिश्ता मंजूर
हैं l
इसके कई रोज
बाद भक्ति बुआ
हमारे घर आई
l साथ में एक
सुन्दर युवती थी l मम्मी
क़ी उत्सुकता पूर्ण
नजरे बुआ ने
देख लिए l भक्ति
बुआ कुछ कहे,
इससे पहले ही
वह युवती बोल
पड़ी l
"माँ जी, मैं
हाथ जोडती हूँ
क़ी श्रुति की
शादी अरुण से
न करे l आप
जिस विदेशी चकाचौध
से प्रभावित होकर
श्रुति का विवाह
करने जा रही
,वह अस्थाई हैं
l अरुण ने मुझसे
शादी क़ी थी
l अमेरिका ले गया
l मगर कुछ ही
दिनों के बाद
मुझे उसका असली
चेहरा मालुम हुआ
l मेरी जिंदगी का वह
सबसे बुरा दिन
यह था क़ी
अरुण पहले से
ही शादी-शुदा
था l मेरे माता-पिता ने
विदेशी चमक में
यह देखना भूल
गए क़ी उस
व्यक्ति के व्यक्तित्व
कितना गन्दा हैं
l साल भर पहले
मेरा उनसे तलाक
हुआ हैं l
इसीलिए जब मैंने
सूना क़ी एक
लड़की क़ी जिंदगी
फिर उजड़ने वाली
हैं तो मैं
रह न पायी
l यह तो भक्ति
जी का शुकर
हैं क़ी मेरी
मुलाकात उनसे हो
गई l
मम्मी को जैसे
बिच्छु ने डंक
मार ली हो
l जैसे उनकी कानों
में विश्वास ही
नहीं हुआ l उन्हें
लगा होगा बेटी
का अच्छा रिश्ता
देखकर सभी जल
रहे हैं l
लेकिन भक्ति बुआ के
साथ उस युवती
का आना मुझे
बहुत अच्छा लगा
l भगवान् जैसे मेरी
लाज बचाने भेजा
हो l अमित में
क्या कमी हैं
? पढ़ा -लिखा है
l अच्छा खासा नौकरी
हैं ,समझदार हैं
और सबसे बड़ी
बात तो यह
हैं की वह
मुझे समझता हैं
l हमारे विचार मिलते हैं
l मगर मम्मी ! वह
क्या चाहती हैं
? रुपया -पैसा ! भक्ति बुआ
के चले जाने
पर मम्मी को
थोडा गंभीर होते
मैंने देखा l
पहले जैसा पापा
से इस विषय
पर बाते करते
नहीं देखी l
एक रोज मम्मी
चारु बुआ के
घर से लौटी
l उन्होंने तार भेजकर
उन्हें बुलाया था l शायद
कोई गंभीर बाते
होगी l वर्ना मम्मी को
क्यों बुलवाती l मम्मी
चारु बुआ के
घर से लौटकर
गंभीर दीख रही
थी l
सोफे पर बैठते
हुए मम्मी ने
कहा -
"बेटा
जरा एक ग्लास
पानी पिलाना l " मम्मी
का बदलाव मुझे
आश्चर्य कर गया
l पानी का ग्लास
मम्मी को थमाते
हुए मैंने पूछा
-
"क्या
बात हैं मम्मी
आप इतनी परेशान
दीख रही हो
?"
लम्बी सांस छोड़ते
हुए मम्मी ने
मेरी तरफ देखा
फिर जो कहा
वह सुनकर मैं
दंग रह गई
l यह कैसे हुआ
? चारु बुआ और
फूफाजी का महीने
भर पहले तलाक
हो गया था
,फूफाजी ने वही
एक विदेशी लड़की
से ब्याह रचा
लिया हैं l यह
सुन दिल को
काफी धक्का लगा
l
मम्मी ने प्यार
से कहा - "बेटा
,एकदिन अमित को
घर बुलाना l अपने
ही मुल्क के
चमकते हीरे को
मैं विदेशी चकाचौध
में देख नहीं
पायी थी l माँ
को जैसे आज
पश्चताप हो रहा
था l
माँ का यह
प्यार भरा रूप
मैंने पहले कभी
नहीं देखा था
l सोच रही हूँ
मम्मी का अमित
से मिलने की
ललक मेरे लिए
एक खुबसूरत तोहफा
तो नहीं ?
रीता सिंह"सर्जना"
मार्फतः डी एफ
ओ'ज ऑफिस
पोः कलियाभोमोरा
दोलाबारी
तेजपुर (असम)
पिनः
784027
email:-rita30singh@gmail.com
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