बस इज ऑलवेज राईट (लघुकथा)
सभी कर्मचारियों को फ़ौरन
बॉस के चेंबर
में इमरजेंसी मीटिंग
के लिए बुलाया
गया l एक ने
कहा आज बॉस
का माथा बहुत
गरम हैं l तभी
मिसेस सान्याल बोली
- "हाँ मुझे डांटने
के लिए बुलाया
होगा l " कुछ देर
पहले मिसेस सान्याल
और मिसेस बरुआ
को बॉस ने
बुलाकर खूब डाटा
था ,यह कहते
हुए कि दोनों
ने टाइम से
काम पूरा करके
नहीं दिया l बॉस
का सीधा-सीधा
मतलब था कि
वे कामचोर हैं
,अपनी ड्यूटी इमानदारी
से नहीं करती
l बॉस बहुत आग
बबूला हो गए
थे l डाटकर जी
नहीं भरा तो
पुरे कर्मचारियों को
मीटिंग के लिए
बुला लिया l मीटिंग
क्या था बस
भड़ास निकालना था
l बॉस गुस्से में
बोलते गए ......चार
घंटो में मिसेस
सान्याल आप काम
पूरा नहीं कर
सकी जबकि मैंने
इमेडीइटली पुट अप
करने को कहा
था ,मिसेस सान्याल
बोली सर मुझे
मिसेस बरुआ ने
लेटर ही नहीं
दिया तो मैं
क्या करती ? अब
बॉस मिसेस बरुआ
की और मुखातिब
होकर कहने लगे
- " सो मिसेस बरुआ , मुझे
आप से यह
कतई उम्मीद नहीं
थी l एक छोटा
सा काम भी
आप से नहीं
होता , सरकार हमें काम
के लिए पैसे
देते हैं , यदि
हम काम ही
नहीं करेंगे तो
यह सरासर धोखा
करना हुआ न!
हमें तो फिल्ड
में भी देखना
पड़ता हैं और
आपलोगों से आराम
का काम भी
नहीं होता ? मुझे
बहुत बुरा लगा
, इसका मतलब आपलोग
अपनी जिम्मेदारी अच्छे
से नहीं करते
हैं l बॉस बोलते
ही चले गये
थे l उन्होंने यह
भी नहीं सोचा
कि अगले कि
बाते सुनी जाए
......मगर मिसेस बरुआ चुप
थी .......बिलकुल चुप ........ क्योंकि
वह जानती थी
की गुस्से की
आग में सफाई
पेश करने का
मतलब हैं आग
में घी डालना
l क्या हुआ बॉस
को लगा की
वह काम नहीं
करती हैं l पर
हकीकत तो उसे
पता था न
? मीटिंग में सिर्फ
बॉस की आवाज
गूंजती रही , न उन्होंने
दूसरे पक्ष का
कुछ सुनना जरुरी
समझा न ही
मिसेस बरुआ ने
अपनी सफाई पेश
करना जरुरी समझी
, क्योंकि उसे अपने
आप पर भरोसा
था , उससे बस
काम में ही
तो डिले हुआ
था , ऐसा कोई
अपराध तो नहीं
किया था जिससे
कि उसे शर्मिंदगी
उठानी पड़ रही
हो , उसे तो
बॉस की इस
बर्ताव पर दया
आ रही थी
l बहरहाल उसके मष्तिष्क
पर मिसेस भंडारी
के कहे वह
वाक्य गूंज रहा
था -" बॉस इज
ऑलवेज राईट " l
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